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: गंगा स्नान और पतिव्रता नारी का दर्शन दोनों का एक सा फल मिलता है_ विपिन बिहारी दास महाराज।

admin

Wed, Nov 20, 2024

गंगा स्नान और पतिव्रता नारी का दर्शन दोनों का एक सा फल मिलता है_ विपिन बिहारी दास महाराज।

   दमोह। शहर के फुटेरा वार्ड दो नरसिंह मंदिर के समीप राम जानकी शाला में श्री शिव महापुराण कथा आयोजन के आठवें दिवस कथा वाचक पंडित विपिन बिहारी दास महाराज ने पति और पत्नी के रिश्ते के महत्व के बारे में बताया।  उन्होंने कहा कि मां गंगा का स्नान और पतिव्रता नारी का दर्शन दोनों में एक सा फल मिलता है। यह बात शास्त्र सम्मत है शास्त्रों में भी यह लिखा है कि आप चाहे गंगा में स्नान कर लो या किसी पतिव्रता नारी का दर्शन कर लो उसका अच्छा ही फल मिलता है, लेकिन आज पति-पत्नी के बीच सम्मान खत्म हो गया है और पत्नियां आज पति को नाम से तक बुलाने लगी है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। पत्नियों को हमेशा पति को सम्मान नहीं देना चाहिए पति की इच्छा के बिना कभी कोई व्रत भी नहीं करना चाहिए। यदि पत्नी कोई व्रत करती है तो सबसे पहले उसमें पति से अनुमति लेनी चाहिए नहीं तो उसे व्रत का कोई फल नहीं मिलता। कभी भी पत्नी को पति से अधिक ऊंचे स्थान पर नहीं बैठना चाहिए, पति के खाना खाए बिना पत्नी को कभी खाना नहीं खाना चाहिए। लेकिन आज समाज में क्या हो रहा है वह सभी देख रहे हैं। पत्नियां ना तो किसी काम में पति की अनुमति लेती है और ना ही इस बात का ध्यान रखती है कि पति के खाना खाने के पहले उन्हें अभी खाना नहीं खाना चाहिए।   जिस प्रकार से आज बेटियों के घर में कलह हो रही है इसका सबसे बड़ा कारण है इन बेटियों की माता जो हर वक्त अपनी बेटी को फोन से पल-पल की जानकारी लेती है। स्थितियां यह हो जाती है कि उसे बेटी के घर में कलह मच जाती है। उस माता-पिता से अधिक दुर्भाग्यशाली कोई नहीं है जिसकी शादीशुदा बेटी मायके में आकर रहने लगे। माता को यह करना चाहिए की बेटी घर में किस तरह से रह रही है उसे रहने दो। उसे यह शिक्षा देनी चाहिए कि दो बातें सुनकर चलो तभी तुम्हारा घर स्वर्ग बनेगा, लेकिन आज माताएं अपनी बेटी को फोन लगाकर पूरी जानकारी लेंगी। यदि बेटी ने ससुराल के बारे में कुछ बुरा कह दिया तो मां कह देती है की चिंता मत करो अभी पिताजी को भेज रहे हैं।  कथा व्यास ने माताओं से कहा कि वह अपनी बेटी को उसके हाल पर छोड़ दें उसका घर आराम से बसने दे। उसे शिक्षा दें कि ससुराल में सास ससुर और पति की दो बातें सुनकर चले तभी वह घर स्वर्ग होगा। यदि मां बेटी के ससुराल में दखल देगी तो उसे बेटी का घर कभी नहीं बस सकता। शिव महापुराण की कथा में भी यही बात लिखी है की माता को अपनी बेटी के ससुराल में ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए। कथा को सुनने हजारों की संख्या में महिला,पुरुष कथा पंडाल पहुंच रहे हैं।

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