: सिक्कों से खेलते बच्चे, शिक्षा का सपना अधूरा
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Sat, Nov 9, 2024
सिक्कों से खेलते बच्चे, शिक्षा का सपना अधूरा
गाँव सगौरिया के बच्चों का भविष्य शिक्षा के अभाव में अंधकारमय
विनोद कुमार जैन, बक्सवाहा
जनपद शिक्षा केन्द्र बक्सवाहा के सगौरिया गाँव की तस्वीरें शिक्षा के बुनियादी अधिकार की विडंबनापूर्ण कहानी बयां करती हैं। यहाँ के बच्चों का जीवन स्कूल से कोसों दूर है, और उनके दिन सिक्कों से खेलने में गुजरते हैं, मानो शिक्षा उनके लिए महज एक सपना हो। गाँव के कई बच्चे, जिनकी उम्र 6 से 11 वर्ष है, स्कूल की सुविधा के बिना अपना भविष्य अंधकार में देख रहे हैं। इन बच्चों में से भरत आदिवासी (पिता: हीरा आदिवासी), सरस्वती आदिवासी (पिता: पुन्ना आदिवासी), घनश्याम आदिवासी (पिता: दम्मू आदिवासी), और कविता यादव (पिता: जाहर यादव) जैसे मासूम हैं, जो खेल में समय बिता रहे हैं, जबकि उनका जीवन शिक्षा की राह तकते हुए ठहर सा गया है।
दूरस्थ स्कूल और कठिन रास्ते - बड़ी बाधा
सगौरिया गाँव में लगभग 65 परिवारों की आबादी करीब 300 के आसपास है। निकटतम प्राथमिक स्कूल गाँव से पाँच किलोमीटर दूर स्थित है, जिसके लिए बच्चों को कठिन पहाड़ी और घने जंगल की राह तय करनी पड़ती है। वर्ष 2015 में गाँव का प्राथमिक स्कूल बंद होने के बाद से बच्चों की शिक्षा का मार्ग अवरुद्ध हो गया है। ग्रामीण अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव और बंद स्कूल के कारण उनके प्रयास विफल हो जाते हैं।
समिति की रिपोर्ट - बच्चों के विकास पर संकट
जनपद शिक्षा केंद्र बक्सवाहा द्वारा गठित एक समिति ने 29 अक्टूबर 2024 को सगौरिया गाँव का दौरा किया। सर्वेक्षण में पाया गया कि गाँव में कुल 45 बच्चे स्कूल जाने के योग्य हैं, पर शिक्षा के अभाव में उनका विकास अवरुद्ध हो रहा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पाँच बच्चों के पास समग्र आईडी नहीं है, फिर भी वे शिक्षा के अधिकारी हैं। समिति ने गाँव में प्राथमिक विद्यालय की स्थापना का सुझाव दिया है ताकि बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिले और उनका भविष्य सुधर सके।
प्रशासन से ग्रामीणों की माँग
सगौरिया के ग्रामीण, जैसे हरीराम यादव, हरिनारायन अहिरवार, अर्जुन आदिवासी, और कशीराम आदिवासी, ने स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए गाँव में प्राथमिक विद्यालय खोला जाए। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों का भविष्य अंधकार में न जाए, इसके लिए समाज और प्रशासन दोनों को गंभीरता से कार्य करना चाहिए।
बीआरसीसी का आश्वासन
बक्सवाहा के बीआरसीसी चंद्र विजय सिंह बुंदेला ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर सभी आवश्यक कार्यवाहियाँ पूरी कर जिला कार्यालय को भेज दी गई हैं। जैसे ही आदेश प्राप्त होगा, प्राथमिक विद्यालय का संचालन प्रारंभ कर दिया जाएगा।
सगौरिया के दम्मू आदिवासी, जाहर आदिवासी, अच्छेलाल, हरिकिशन आदिवासी, और भागवत आदिवासी जैसे ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की यह स्थिति प्रशासन से सवाल पूछती है कि आखिर कब तक ये मासूम बच्चे सिक्कों से खेलते रहेंगे? शिक्षा विभाग से अपेक्षा है कि जल्द ही ठोस कदम उठाकर इन बच्चों को शिक्षा का अधिकार प्रदान किया जाए ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके।Tags :
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