: अजब धाम पँहुची ब्लड डोनेशन वैन महंत जी और sdm सहित सौ लोगो ने किया रक्तदान
admin
Mon, Feb 24, 2025
अजब धाम पँहुची ब्लड डोनेशन वैन महंत जी और sdm सहित सौ लोगो ने किया रक्तदान
अजब धाम में जै जै सरकार वार्षिक महोत्सव में रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया,जिला मुख्यालय से ब्लड डोनेशन वैन अजब धाम पँहुची जिसमे अजब धाम के महंत छोटे सरकार जी,पथरिया अनुविभागीय अधिकारी निकेत चौरसिया सहित ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों,कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों ने रक्तदान कर पूण्य कार्य किया
बीएमओ डॉ उमाशंकर पटेल ,डॉ प्रशान्त सोनी,लेब टेक्नीशियन संजय,मनोज श्रीवास्तव आदि स्वास्थ्य अमले ने रक्तदाताओं का आवश्यक परीक्षण कर ब्लड जमा किया,शिविर में महामंत्री गोपाल पटेल,प्रधान आरक्षक विपेश चौबे, आरक्षक कृष्ण कुमार मिश्रा ,पत्रकार अनिल शर्मा सहित
करीब सौ लोगो ने रक्तदान किया।
यदि मानव रहते परमात्मा को प्राप्त नही किया तो सर्वस्त्र बेकार है- स्वामी श्रवनानन्द सरस्वती जी
अजब धाम में जै जै सरकार वार्षिक महोत्सव में व्यास पीठ से स्वामी श्रवनानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यदि मानव रहते आपने परमात्मा को प्राप्त नही किया तो आपका सर्वस्त्र बेकार है। मनुष्य जीवन का श्रेय क्या है मनुष्य जीवन का श्रेय है भगवत प्राप्ति,आप लोग प्रेम से तो परिचित हो आपको क्या-क्या प्रेम है किंतु यहां प्रेम की चर्चा नहीं श्रेय की चर्चा है.संपूर्ण विषय अन्य योजना में दुर्लभ ऐसा नहीं सुलभ है मनुष्य शरीर एक मात्र ऐसा शरीर है जो भगवान की करुणा से मिला है कृपा से मिला है अनुग्रह से मिला है और भगवान ने अपने मिलने के लिए ही शरीर दिया है मानव शरीर हमें दिया है इस मानव शरीर को प्राप्त करके यदि आपने परमात्मा को प्राप्त नहीं किया तो सर्वस्त्र बर्बाद कर दिया भगवत प्राप्ति में हमें लगना चाहिए
धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की चर्चा शास्त्रों में की गई है,भागवत में भी है किंतु भागवत कार्य में बड़ी विलक्षण बात कही आप यदि धर्माचरण कर रहे हैं तो निरीक्षण करते रहिएगा धर्माचरण करते-करते आपको भागवत रति उत्पन्न हो रही है कि नहीं यदि आपको भागवत नहीं हो रही है भागवत प्रीति उत्पन्न नहीं हो रही है तो आप समझ जाना कि आप धर्माचरण नहीं श्रम कर रहे हैं परिश्रम कर रहे हैं
केवल अर्थ कमाते रहो पैसा कमाते रहो पहले पांच एकड़ जमीन थी फिर दस एकड़ हो गई अभी सौ एकड़ हो जाए बस इसी के लिए नहीं पैदा हुऎ हो आप चाहे सौ एकड़ जमीन बना लेना चाहे हजार एकड़ बना लेना यहां रह नहीं पाओगे कहीं ऐसा ना हो की अर्थ कमाते कमाते धर्म को नही भूलना ।
लोग अपनी ऊर्जा को अपने को बनाने में लगा देते हैं मकान,दुकान,घर, आश्रम में बनाने में लगा देते हैं और जब ऊर्जा हीन हो जाते हैं तो किसी कम के नहीं बचते हैं,फिर भजन में मन नही लगता है।
बीएमओ डॉ उमाशंकर पटेल ,डॉ प्रशान्त सोनी,लेब टेक्नीशियन संजय,मनोज श्रीवास्तव आदि स्वास्थ्य अमले ने रक्तदाताओं का आवश्यक परीक्षण कर ब्लड जमा किया,शिविर में महामंत्री गोपाल पटेल,प्रधान आरक्षक विपेश चौबे, आरक्षक कृष्ण कुमार मिश्रा ,पत्रकार अनिल शर्मा सहित
करीब सौ लोगो ने रक्तदान किया।
यदि मानव रहते परमात्मा को प्राप्त नही किया तो सर्वस्त्र बेकार है- स्वामी श्रवनानन्द सरस्वती जी
अजब धाम में जै जै सरकार वार्षिक महोत्सव में व्यास पीठ से स्वामी श्रवनानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यदि मानव रहते आपने परमात्मा को प्राप्त नही किया तो आपका सर्वस्त्र बेकार है। मनुष्य जीवन का श्रेय क्या है मनुष्य जीवन का श्रेय है भगवत प्राप्ति,आप लोग प्रेम से तो परिचित हो आपको क्या-क्या प्रेम है किंतु यहां प्रेम की चर्चा नहीं श्रेय की चर्चा है.संपूर्ण विषय अन्य योजना में दुर्लभ ऐसा नहीं सुलभ है मनुष्य शरीर एक मात्र ऐसा शरीर है जो भगवान की करुणा से मिला है कृपा से मिला है अनुग्रह से मिला है और भगवान ने अपने मिलने के लिए ही शरीर दिया है मानव शरीर हमें दिया है इस मानव शरीर को प्राप्त करके यदि आपने परमात्मा को प्राप्त नहीं किया तो सर्वस्त्र बर्बाद कर दिया भगवत प्राप्ति में हमें लगना चाहिए
धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की चर्चा शास्त्रों में की गई है,भागवत में भी है किंतु भागवत कार्य में बड़ी विलक्षण बात कही आप यदि धर्माचरण कर रहे हैं तो निरीक्षण करते रहिएगा धर्माचरण करते-करते आपको भागवत रति उत्पन्न हो रही है कि नहीं यदि आपको भागवत नहीं हो रही है भागवत प्रीति उत्पन्न नहीं हो रही है तो आप समझ जाना कि आप धर्माचरण नहीं श्रम कर रहे हैं परिश्रम कर रहे हैं
केवल अर्थ कमाते रहो पैसा कमाते रहो पहले पांच एकड़ जमीन थी फिर दस एकड़ हो गई अभी सौ एकड़ हो जाए बस इसी के लिए नहीं पैदा हुऎ हो आप चाहे सौ एकड़ जमीन बना लेना चाहे हजार एकड़ बना लेना यहां रह नहीं पाओगे कहीं ऐसा ना हो की अर्थ कमाते कमाते धर्म को नही भूलना ।
लोग अपनी ऊर्जा को अपने को बनाने में लगा देते हैं मकान,दुकान,घर, आश्रम में बनाने में लगा देते हैं और जब ऊर्जा हीन हो जाते हैं तो किसी कम के नहीं बचते हैं,फिर भजन में मन नही लगता है।Tags :
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