: प्रधानमंत्री आवास योजना में घोटाले का आरोप: सरपंच ने जनपद पंचायत के कर्मचारी पर लगाया पैसे लेकर सूची में फेरबदल करने क
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Wed, Dec 11, 2024
प्रधानमंत्री आवास योजना में घोटाले का आरोप: सरपंच ने जनपद पंचायत के कर्मचारी पर लगाया पैसे लेकर सूची में फेरबदल करने क
वकस्वाहा, छतरपुर (11 दिसंबर 2024): मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के जनपद पंचायत वकस्वाहा के ग्राम पंचायत महदेवरा में प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। मडदेवरा पंचायत के तत्कालीन सरपंच प्रेम कंबर ने जनपद पंचायत के कर्मचारी विन्देश पाण्डेय पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पैसे लेकर आवास सूची में फेरबदल किया और पात्र लाभार्थियों को आवास से वंचित कर दिया। सरपंच ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
सरपंच ने उठाया भ्रष्टाचार का पर्दाफाश: गड़बड़ी और पैसों की उगाही के आरोप
सरपंच प्रेम कंबर ने अपने पत्र में बताया कि मडदेवरा पंचायत में कुल 32 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए थे, लेकिन पंचायत सचिव द्वारा आवास वितरण में गड़बड़ी की गई। सरपंच के अनुसार, सचिव ने सूची में कमांक 52 तक आवास वितरित किए, लेकिन उसके बाद कमांक 69 और 71 तक के नाम सूची में जोड़ दिए गए। हैरानी की बात यह है कि कमांक 53 से लेकर 68 तक के पात्र हितग्राहियों को आवास से वंचित कर दिया गया, जबकि इन नामों को सूची के अनुसार पहले आवास मिलना चाहिए था।
सरपंच ने आरोप लगाया कि यह गड़बड़ी जानबूझकर की गई और इसके पीछे पैसे लेने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि विन्देश पाण्डेय नामक कर्मचारी ने कुछ लोगों से पैसे लेकर उनके नाम सूची में शामिल किए, जबकि जिन पात्र व्यक्तियों को पहले आवास मिलना था, उनका नाम बिना किसी स्पष्ट कारण के हटा दिया गया। सरपंच ने यह भी कहा कि जिन कर्मचारियों के पास प्रधानमंत्री आवास योजना का प्रभार था, उन्होंने आवास वितरण के बदले लाभार्थियों से पैसे की उगाही की। जो लोग पैसे नहीं दे पाए, उनके नाम सूची से हटा दिए गए।
मुख्यमंत्री से अपील: जांच और कार्रवाई की मांग
सरपंच ने मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री और मुख्य सचिव से अपील की है कि इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जो पात्र लोग इस योजना के तहत आवास पाने के योग्य थे, उन्हें बिना किसी भेदभाव के तत्काल आवास प्रदान किए जाएं। सरपंच के अनुसार, यह मामला प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भ्रष्टाचार का प्रतीक है और यह उन जरूरतमंद लोगों के साथ अन्याय है, जो इस योजना का लाभ पाने के पात्र थे।
जांच रिपोर्ट: मुख्य कार्यपालन अधिकारी का बयान
इस मामले पर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी भगीरथ तिवारी ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए एक दल गठित किया गया था, जिसकी जांच रिपोर्ट कमिश्नर कार्यालय को भेजी गई है। तिवारी ने कहा कि रिपोर्ट में किसी प्रकार का कोई फेरबदल नहीं पाया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन हितग्राहियों ने शिकायत की थी, उनके नाम सूची में नहीं थे। तिवारी ने आरोपों को गलत और निराधार बताया और कहा कि पैसे लेकर सूची में फेरबदल करने के आरोप सही नहीं पाए गए हैं।
ग्रामीणों और हितग्राहियों का कहना है कि वे इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की उम्मीद करते हैं और चाहते हैं कि जिनसे आवास का हक छीन लिया गया, उन्हें न्याय मिले। मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तव में सूची में फेरबदल हुआ था या यह सिर्फ आरोप थे।
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