: मनरेगा में अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई, जिले की वकस्वाहा जनपद की 28 पंचायतों से 1146.62 लाख रुपये की वसूली का आदेश
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Sun, Jul 28, 2024
मनरेगा में अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई,
जिले की वकस्वाहा जनपद की 28 पंचायतों से 1146.62 लाख रुपये की वसूली का आदेश
विनोद कुमार जैन
वकस्वाहा :- 19 जुलाई 2024 – जिला पंचायत छतरपुर की सीईओ तपस्या सिंह परिहार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत स्वीकृत किए गए गैर अनुमत्य कार्यों में अनियमितताओं के चलते 28 पंचायतों से 1146.62 लाख रुपये की वसूली का सख्त आदेश जारी किया है।
आदेश की मुख्य बातें
गैर अनुमत्य कार्यों का निरस्तीकरण
जनपद पंचायत बक्स्वाहा में मनरेगा के तहत स्वीकृत 06 बेंच ट्रेसिंग कार्यों (149.38 लाख रुपये), 06 खरंजा निर्माण कार्यों (86.39 लाख रुपये) और 05 पुलिया निर्माण कार्यों (56.72 लाख रुपये) को निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इन कार्यों में सामग्री की राशि मनरेगा से ली गई थी, जबकि पुलिया निर्माण में केवल मजदूरी की राशि ही ली जानी चाहिए थी।
स्टोन बंड कार्यों में अनियमितता
28 ग्राम पंचायतों में स्टोन बंड के 84 कार्यों के लिए 1146.62 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इनमें बेरखेरी में 06 कार्य (83.85 लाख रुपये), निवार में 06 कार्य (64.48 लाख रुपये), जैतूपुरा में 05 कार्य (68.68 लाख रुपये), कैरवार में 05 कार्य (73.10 लाख रुपये), कुषमाण में 04 कार्य (59.19 लाख रुपये), मुड़ियाबुजुर्ग में 04 कार्य (58.75 लाख रुपये), किशुनपुरा में 03 कार्य (43.95 लाख रुपये), मुड़िया में 04 कार्य (59.36 लाख रुपये), खमरिया में 03 कार्य (44.28 लाख रुपये), और पाली में 03 कार्य (40.20 लाख रुपये) शामिल हैं।
निर्देशों की अवहेलना
21 मई 2024 को हुई जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिया गया था कि जिन ग्राम पंचायतों में स्टोन बंड के एक से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए हैं और 20 प्रतिशत से कम राशि व्यय हुई है, उन्हें बंद कर दिया जाए। इसके बावजूद 34 कार्यों में से 18 कार्यों में 41.56 लाख रुपये की राशि व्यय की गई, जो निर्देशों का उल्लंघन है।
20 लाख से अधिक लागत के कार्य
20 लाख से अधिक लागत के 23 तालाबों को भी नियम विरुद्ध स्वीकृत किया गया था, जिन्हें कार्यालयीन पत्र क्रमांक 18/जि.पं./मनरेगा/2024 छतरपुर दिनांक 02.01.2024 के तहत निरस्त करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन, 19.07.2024 की मनरेगा की ऑनलाइन रिपोर्ट में पाया गया कि उक्त कार्य निरस्त नहीं किए गए और 676597 रुपये की राशि व्यय की गई।
कड़े निर्देश:
जिला पंचायत छतरपुर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत गैर अनुमत्य कार्यों को तत्काल निरस्त किया जाए, नियम विरुद्ध स्वीकृत करने वालों की जिम्मेदारी तय की जाए और व्यय राशि की वसूली की जाए। यह कार्यवाही एक सप्ताह के भीतर पूरी कर जिले के नोडल खाते में राशि जमा कराई जाए। संबंधित अधिकारियों से की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इस आदेश के पालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश मनरेगा के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे जनपद पंचायतों में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सकेगा।
*इस मामले में बक्स्वाहा जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी भगीरत तिवारी का कहना है कि आदेश मिलते ही रिकवरी प्रस्तावित कर, रिकवरी के आदेश जारी कर दिया गया है*।
इस मामले में जिला सीईओ तपस्या सिंह परिहार ने आदेश में एकदम साफ शब्दों में कहा था कि एक सप्ताह के भीतर राशि नोडल अधिकारी के खाते में जमा कराई जाए। अब यह देखना रोचक होगा कि एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन बक्स्वाहा सीईओ करा पाते हैं या सब ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
28 ग्राम पंचायतों में स्टोन बंड के 84 कार्यों के लिए 1146.62 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इनमें बेरखेरी में 06 कार्य (83.85 लाख रुपये), निवार में 06 कार्य (64.48 लाख रुपये), जैतूपुरा में 05 कार्य (68.68 लाख रुपये), कैरवार में 05 कार्य (73.10 लाख रुपये), कुषमाण में 04 कार्य (59.19 लाख रुपये), मुड़ियाबुजुर्ग में 04 कार्य (58.75 लाख रुपये), किशुनपुरा में 03 कार्य (43.95 लाख रुपये), मुड़िया में 04 कार्य (59.36 लाख रुपये), खमरिया में 03 कार्य (44.28 लाख रुपये), और पाली में 03 कार्य (40.20 लाख रुपये) शामिल हैं।
निर्देशों की अवहेलना
21 मई 2024 को हुई जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिया गया था कि जिन ग्राम पंचायतों में स्टोन बंड के एक से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए हैं और 20 प्रतिशत से कम राशि व्यय हुई है, उन्हें बंद कर दिया जाए। इसके बावजूद 34 कार्यों में से 18 कार्यों में 41.56 लाख रुपये की राशि व्यय की गई, जो निर्देशों का उल्लंघन है।
20 लाख से अधिक लागत के कार्य
20 लाख से अधिक लागत के 23 तालाबों को भी नियम विरुद्ध स्वीकृत किया गया था, जिन्हें कार्यालयीन पत्र क्रमांक 18/जि.पं./मनरेगा/2024 छतरपुर दिनांक 02.01.2024 के तहत निरस्त करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन, 19.07.2024 की मनरेगा की ऑनलाइन रिपोर्ट में पाया गया कि उक्त कार्य निरस्त नहीं किए गए और 676597 रुपये की राशि व्यय की गई।
कड़े निर्देश:
जिला पंचायत छतरपुर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत गैर अनुमत्य कार्यों को तत्काल निरस्त किया जाए, नियम विरुद्ध स्वीकृत करने वालों की जिम्मेदारी तय की जाए और व्यय राशि की वसूली की जाए। यह कार्यवाही एक सप्ताह के भीतर पूरी कर जिले के नोडल खाते में राशि जमा कराई जाए। संबंधित अधिकारियों से की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इस आदेश के पालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश मनरेगा के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे जनपद पंचायतों में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सकेगा।
*इस मामले में बक्स्वाहा जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी भगीरत तिवारी का कहना है कि आदेश मिलते ही रिकवरी प्रस्तावित कर, रिकवरी के आदेश जारी कर दिया गया है*।
इस मामले में जिला सीईओ तपस्या सिंह परिहार ने आदेश में एकदम साफ शब्दों में कहा था कि एक सप्ताह के भीतर राशि नोडल अधिकारी के खाते में जमा कराई जाए। अब यह देखना रोचक होगा कि एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन बक्स्वाहा सीईओ करा पाते हैं या सब ठंडे बस्ते में चला जाएगा।Tags :
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